गुरुवार, 8 सितंबर 2022

पत्नी परम धर्म

पत्नी परम धर्म
विवाह उपरांत मुझे आत्मज्ञान हुआ,
नेत्र खुल गए मेरे, मार्ग मेरा परमार्थ हुआ।
जब हुए तुम्हारे रौद्र विकट रूप के दर्शन।
तब जाके मेरा सौभाग्य चरितार्थ हुआ।

जीवन मे निकटता ज्यों ज्यों बढ़ी,
मेरी तो विकटता भी त्यों त्यों बढ़ी।
हे प्रिये, तुम अद्भुत हो, अद्वितीय हो,
तुमसे कैसा तर्क? तुम अविजित हो।

तुम अति गुणवती, बलवान हो।
सारी कलाएं तुमसे विद्यमान हैं।
मेरी विधि तुम, तुम ही विधान हो।
मेरा तुम्हें शास्टांग प्रणाम है।

हे प्रिये, तुम जितनी सुंदर हो।
ठीक उतना ही मैं बुद्धिमान हूँ।
विवाह उपरांत सत्य विदित हुआ।
तुम ही अतिकुशल सर्व शक्तिमान हो।



बुधवार, 7 सितंबर 2022

मानस उद्भव

महापिंडो का महापिण्डों से मर्दन,
ब्रह्मांड ने किया विनाशकारी कृन्दन।
महाप्रलयंकारी महाविस्फोट हुआ,
तब जाके सौर मंडल प्रस्फ़ुट हुआ।

सूर्य का प्रज्वलन, नवग्रह संस्कार हुआ।
मात्र पृथ्वी पर पंचतत्व का उद्गार हुआ।
प्राकृतिक साम्य से वातावरण हुआ प्रणीत,
धरती माँ का जीवन स्वप्न साकार हुआ।

जल से थल पर, थल से नभ पर,
जीवन का उद्भव फिर प्रचार हुआ।
विकसित हुए जीव जंतु और मानव,
जीवन से ही जीवन का प्रसार हुआ।

प्रकृति की विकास लीला भी परम् है।
सभी जीवों की श्रंखला में मानव चरम है।
बाकी जीवों का विकास ही सीमांत है।
जीवों में मात्र मानव की सीमा अनन्त है।












शनिवार, 18 जून 2022

नई दिल्ली में मिली थी

ये प्यार था, दो दिलों की हेरा फेरी थी।
ट्रेन की पों पों,भीड़ की जोराजोरी थी।
याद करो जब नई दिल्ली में मिली थीं।
न मैंने सुन न चाहा,न तुम कुछ कह रही थीं।

आलू पूरी की,तो समोसे की गरमाहट थी।
भरी गर्मी में भी दो दिलों में सरसराहट थी।
था तुमसे मिलना शुद्ध प्रचुर नई दिल्ली में।
भले खाने के हर सामान में मिलावट थी।

वेटिंग टिकट थे,हमें सीट की थी कहाँ फिकर।
मेरे दिल में दिमाग में था बस तुम्हारा जिकर।
याद करो जब तुम हमसे नई दिल्ली में मिलीं थीं।
जब अनजान नजरें एक दूसरे को देख फिसलीं थी।।

ऊपर वाले ने भी क्या चुन कर हमें मिलवाया था।
न तुम कुछ कह पाई थीं,न मैं कुछ सुन पाया था।
क्या बेहतरीन जोड़ी नई दिल्ली स्टेशन में मिली थी।
तुम बेचारी गूंगी थी, मेरे कानों पर सुना साया था।







मंगलवार, 18 जनवरी 2022

हाथ थामें रखना

कभी मैं सुनूँगा, तुम कहना,
कभी तुम सुन लेना मेरा कहना!
चलता रहेगा ये कहना सुन ना
बस तुम मेरा हाथ थामें रखना,

हों हवाएं सर्द चाहे जितनी,
तुम मेरी बाहों में बाहें रखना।
हों आंधियां तेज चाहे जितनी,
तुम हाथों में हाथ थामें रखना।

सांस का है सांस से नाता,
मेरी धड़कन बनके रहना,
मेरी रूह बन कर निभाना,
बस मेरा हाथ थामें रखना।

दूरियां होंगी तो मिटेंगी भी,
नज़दीकियों को समझना।
आंखे हैं तो सिसकेंगी भी,
बस मेरा हाथ थामें रखना।

दोनों जीवन का स्वाद चखेंगे,
तुम मेरी मिठास बनके रहना,
दोनों मिलकर खिचड़ी पकाएंगे,
तुम बस मेरा हाथ थामें रखना।

तुम हो मेरे दिल की रानी,
मुझे राजा बना के रखना,
होंगे राजकुमार राजकुमारी,
बस मेरा हाथ थामें रखना।



"नितेश तिवारी"