रूह मेरी दूर खामोश खड़ी होती है।
हर खता मेरी आंखों में पढ़ लेती है।
वो बढ़ी आंखों से मेरी खबर लेती है।
आंखों में उसकी रंगीनियत ऐसी कि,
उसके आगे सारे नगीने फीके पड़ जाएं।
उसके चेहरे में है मासूमियत ऐसी कि,
दुनिया जहां के फरिश्ते भी पीछे पड़ जाएं।
मेरी गलतियों पर चुप रहती है।
उसके आंसुओं से तड़प जाता हूँ।
मुझसे कहीं बोलना बंद न कर दे।
मैं ये सोच कर भी घबरा जाता हूँ।
आंखें उसकी अलख जगा देती है।
मुझे जीने की वजह बता देती है।
मैं जब कभी वादे तोड़ देता हूँ।
प्यार भरे ताने दे के सजा देती है।
मैं थोड़ा बदमिजाज बेअदब हूँ।
वो बड़ी खुशमिजाज बाअदब है।
मैं उसकी मोहब्बत से भरा पड़ा हूँ।
पर वो मेरी मोहब्बत से लबा लब है।