दईद सार के खलमुसर,सिल बट्टा,
पिसञs माल़ मसाला, भांगे क पत्ता,
चलs दुनऊ संघवा खेली फगुआ,
ए काल कचरहीं कुल कपड़ा लत्ता।
बता द मसाला तेल कहा बा,
न मिल्ई त, खोजञ का कहा बा
आव तू हम खेली फगुआ,
बिसर जाई आज, के कहां बा।
ए तलई समोसा, कचरी,भजिया,
तू रसभंगा संघे ल नमकिनिया,
आव होई जाए खेल खेलनिया,
तोहईय लगाई अबीर बुकनिया।
सरऊ से घोंटवायी भंगिया,
फिर पिसवाई चटनी धनिया,
दे दना दन तू हम खेली फगुआ
छानी रसभंगा, चाट चटनियां।
अउर ऐ करेजा, तोहई बदे बा!
सुतारे लगवा ल रंग रंगनिया,
ढेर जिन नाच! नाच नचनिया,
ना त मुर्चा जाई कमर कलईयां,
हम बनी फगुआ, तू बनs फगुनिया।
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