शुक्रवार, 3 मार्च 2023

सरहज संग फगुआ

दईद सार के खलमुसर,सिल बट्टा,
पिसञs माल़ मसाला, भांगे क पत्ता,
चलs दुनऊ संघवा खेली फगुआ,
ए काल कचरहीं कुल कपड़ा लत्ता।

बता द मसाला तेल कहा बा,
न मिल्ई त, खोजञ का कहा बा 
आव तू हम खेली फगुआ,
बिसर जाई आज, के कहां बा।

ए तलई समोसा, कचरी,भजिया,
तू रसभंगा संघे ल नमकिनिया,
आव होई जाए खेल खेलनिया,
तोहईय लगाई अबीर बुकनिया।

सरऊ से घोंटवायी भंगिया,
फिर पिसवाई चटनी धनिया,
दे दना दन तू हम खेली फगुआ
छानी रसभंगा, चाट चटनियां।

अउर ऐ करेजा, तोहई बदे बा!

सुतारे लगवा ल रंग रंगनिया,
ढेर जिन नाच! नाच नचनिया,
ना त मुर्चा जाई कमर कलईयां,
हम बनी फगुआ, तू बनs फगुनिया।