पीड़ित,पीढ़ियों से पीड़ित रहा,
पीड़ाऔं का पीड़ित को पीढ़ियों बाद पता चला।
पीड़ाऔं से निकलने का भी पीड़ित को पीढ़ियों बाद पता लगा।
पीढ़ियों बाद पीड़ित,पीड़ाऔं से बाहर जा निकला।
पीढ़ियों बाद पीड़ित,पीड़ाऔं से निकल तो गया।
पर लग गया अपनी पीढ़ियों को बना ने में,
और पीढियां भी हैं उन्हें तो भूल गया।
भेद पता चल गया उसे पीड़ित बने रहने में।
अब बचा पीढ़ियों का जो पीड़ित है।
पता उसे,अपीड़ित तो अब अपीड़ित है।
पर अपीड़ित,पीड़ित को आगे कर रहा।
पीड़ित,अपीड़ित की पीड़ा के लिए लड़ रहा।
पीड़ा का खेल तो पीढ़ियों से चल रहा।
पीड़ित तो पीड़ित,अपीड़ित पीड़ित बन रहा।
अपीड़ित अब पीड़ा से नहीं लड़ रहा,
अपीड़ित,पीड़ित की पीड़ा से खेल रहा।
नितेश तिवारी
पीड़ाऔं का पीड़ित को पीढ़ियों बाद पता चला।
पीड़ाऔं से निकलने का भी पीड़ित को पीढ़ियों बाद पता लगा।
पीढ़ियों बाद पीड़ित,पीड़ाऔं से बाहर जा निकला।
पीढ़ियों बाद पीड़ित,पीड़ाऔं से निकल तो गया।
पर लग गया अपनी पीढ़ियों को बना ने में,
और पीढियां भी हैं उन्हें तो भूल गया।
भेद पता चल गया उसे पीड़ित बने रहने में।
अब बचा पीढ़ियों का जो पीड़ित है।
पता उसे,अपीड़ित तो अब अपीड़ित है।
पर अपीड़ित,पीड़ित को आगे कर रहा।
पीड़ित,अपीड़ित की पीड़ा के लिए लड़ रहा।
पीड़ा का खेल तो पीढ़ियों से चल रहा।
पीड़ित तो पीड़ित,अपीड़ित पीड़ित बन रहा।
अपीड़ित अब पीड़ा से नहीं लड़ रहा,
अपीड़ित,पीड़ित की पीड़ा से खेल रहा।
नितेश तिवारी
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें