गुंजिया संग भांग चढ़ी तन मन में,
उमड़े लहर अबीर की गलीयन में,
मस्ती चढ़ी,अंग-अंग भरमायो है,
लागे बस गयो कान्हा मेरी अखियन में।
मिले बहुत दिन पे टोली से,
जीवन में भर गो रंग होली से,
जी ना भरो आज चाची , भाभी संग ठिठोली से,
रंग भर दियो कविता में बीरज की बोली से।
उमड़े लहर अबीर की गलीयन में,
मस्ती चढ़ी,अंग-अंग भरमायो है,
लागे बस गयो कान्हा मेरी अखियन में।
मिले बहुत दिन पे टोली से,
जीवन में भर गो रंग होली से,
जी ना भरो आज चाची , भाभी संग ठिठोली से,
रंग भर दियो कविता में बीरज की बोली से।
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