जलन
अगर नहीं किसी को झुका सकते
तो आखिर लोग जलते क्यों हैं?
अगर नहीं किसी को देख सकते,
तो उस को इतना देखते क्यों है?
जब खुजली नहीं जाती है।
फिर भी आंखे मसलते क्यों हैं?
कुढ़न की बदनामी नहीं जाती है।
फिर भी कुढ़ने को बेबस क्यों है।
जलन खा जाती है इंसान को,
निगल जाती है,इंसानियत को,
दोमुंहे बनकर घूमना पड़ता है।
जन्म देती है,हैवानियत को।
ऐसे लोग जीवित नहीं होते।
अंदर से मर चुके होते है।
सीधे कुछ कह नहीं पाते,
ये लोग बहुत दोगले होते हैं।
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