शनिवार, 18 जून 2022

नई दिल्ली में मिली थी

ये प्यार था, दो दिलों की हेरा फेरी थी।
ट्रेन की पों पों,भीड़ की जोराजोरी थी।
याद करो जब नई दिल्ली में मिली थीं।
न मैंने सुन न चाहा,न तुम कुछ कह रही थीं।

आलू पूरी की,तो समोसे की गरमाहट थी।
भरी गर्मी में भी दो दिलों में सरसराहट थी।
था तुमसे मिलना शुद्ध प्रचुर नई दिल्ली में।
भले खाने के हर सामान में मिलावट थी।

वेटिंग टिकट थे,हमें सीट की थी कहाँ फिकर।
मेरे दिल में दिमाग में था बस तुम्हारा जिकर।
याद करो जब तुम हमसे नई दिल्ली में मिलीं थीं।
जब अनजान नजरें एक दूसरे को देख फिसलीं थी।।

ऊपर वाले ने भी क्या चुन कर हमें मिलवाया था।
न तुम कुछ कह पाई थीं,न मैं कुछ सुन पाया था।
क्या बेहतरीन जोड़ी नई दिल्ली स्टेशन में मिली थी।
तुम बेचारी गूंगी थी, मेरे कानों पर सुना साया था।







मंगलवार, 18 जनवरी 2022

हाथ थामें रखना

कभी मैं सुनूँगा, तुम कहना,
कभी तुम सुन लेना मेरा कहना!
चलता रहेगा ये कहना सुन ना
बस तुम मेरा हाथ थामें रखना,

हों हवाएं सर्द चाहे जितनी,
तुम मेरी बाहों में बाहें रखना।
हों आंधियां तेज चाहे जितनी,
तुम हाथों में हाथ थामें रखना।

सांस का है सांस से नाता,
मेरी धड़कन बनके रहना,
मेरी रूह बन कर निभाना,
बस मेरा हाथ थामें रखना।

दूरियां होंगी तो मिटेंगी भी,
नज़दीकियों को समझना।
आंखे हैं तो सिसकेंगी भी,
बस मेरा हाथ थामें रखना।

दोनों जीवन का स्वाद चखेंगे,
तुम मेरी मिठास बनके रहना,
दोनों मिलकर खिचड़ी पकाएंगे,
तुम बस मेरा हाथ थामें रखना।

तुम हो मेरे दिल की रानी,
मुझे राजा बना के रखना,
होंगे राजकुमार राजकुमारी,
बस मेरा हाथ थामें रखना।



"नितेश तिवारी"

शनिवार, 25 दिसंबर 2021

रफूकारी


                                     (1)

नवनिर्मित नाव अपने पोत से निकलने को तैयार थी। तभी चालक दल में कुछ हड़बड़ी और बोखलाहट हुई। बहुत प्रयासों के बाद पता लगा कि चालक दल की चिंता का कारण नाव में पानी आना था। परन्तु फीता कटने का समय निश्चित था। उसे टालना समझो कि एक्सन साहब का प्रकोप झेलना। 
पर सुगबुगाहट आखिर कब तक सिसकती!
एक्सन साहब को पता लगा तो तुरन्त सम्बंधित अधिकारियों को फोन की किसी अत्याधुनिक एप्लिकेशन पर आगामी आरोप प्रत्यारोप गोलमेज सम्मेलन में तलब कर लिया गया।
सभी अपने अपने प्रकोष्ठों में अपने कपकपाते हाथों में फोन पकड़े साहब के पहले प्रहार को झेलने के लिए ततपर थे।
तो सम्मेलन कुछ यूं शुरू हुआ!

एक्सन साहब: प्राप्त जानकारी के अनुसार नाव में अनुचित मात्रा से अधिक पानी पाया गया है। सम्बंधित विभाग आगे की जानकारी दें।

मुख्य निरीक्षक : महोदय प्रथम दृष्टया मेरे द्वारा किये गए                              औचक निरीक्षण से प्रतीत होता है कि नाव में पानी आ गया है।

एक्सन साहब : अच्छा तो आपने क्या एक्शन लिया।

मुख्य निरीक्षक : महोदय मुख्य फट्टी विभाग को सू चित्त                           कर दिया गया है। आप निश्चिंत रहे समिति दल को हमने भनक भी नहीं लगने दी है।

एक्सन साहब : वो बाद वाला काम अधिक प्रशंसनीय है।
                     फट्टी विभाग के चीफ बताए।

चीफ साहब : जानकारी मिलते ही रिसाव के निरीक्षण व रफू                     के लिए दल को रवाना कर दिया गया है। आगे की जानकारी मिलते ही अवगत करवाया जाएगा।

मुख्य निरीक्षक : गुप्त सम्पर्क सूत्रों के द्वारा प्राप्त सूचना के                        अनुसार समिति दल के प्रधान नाव की और प्रस्थान कर रहें हैं।

एक्सन साहब : चीफ साहब तुरन्त रफू दल को रोका जाए।

चीफ साहब : महोदय आपके आदेश से पूर्व कार्यवाही हो                        चुकी है रफू दल रिसाव के ऊपर ही लेट गया है तथा रफू दल के मुख्य रफुकर जो अभी संस्थान के कार्य से कहीं और रफू करने गए हैं उनसे हम निरन्तर सम्पर्क में हैं।

एक्सन साहब : मुख्य रफुकर को बोलो पैर आकाश की ओर                      करके और हाथों के बल चलकर आएं। छाती ठोक कर नाव को अंतिम रूप उन्होंने ही दिया था।

चीफ साहब : रिसाव की सूचना मिलते ही मुख्य रफुकर को तत्काल द्रुत गति से रवाना होने के आदेश दे दिए हैं।

मुख्य निरीक्षक : महोदय समिति के प्रधान जा चुके हैं।

चीफ साहब : मुख्य  रफुकर रिसाव स्थल पर अवतरित हो                       गया है तथा प्राप्त विशिष्ट विशेषज्ञता से परिपूर्ण जानकारी के अनुसार छेद की आशंका है,पूर्व विभाग के किये गए फट्टी संयोजन में।

मुख्य निरीक्षक : परन्तु पूर्व संयोजन दल द्वारा किये कार्य का                       निरीक्षण हमारा दल कर चुका है।तथा रिसाव तब नहीं था।

एक्सन साहब : सभी से परिणाम की उपेक्षा की जाती है,                           इस समय अवलोकन का समय नहीं है।
चीफ साहब मुख्य रफुकर से समस्या के निवारण में लगने वाले समय का अवलोकन करें।

चीफ साहब : मुख्य रफुकर ने सीना ठोकते हुए कार्य को तीव्र गति से तय समय पर करने की कसम खाते हुए, एक शाम, एक रात और एक दिन का समय मांगा है।

मुख्य निरीक्षक : परन्तु महोदय मेरे अनुसार रिसाव के लिए।

एक्सन साहब : आप चुप रहें, स्थिति का अवलोकन करने में                       बाधा न पहुँचाये, आप पूर्व विभागों से सम्पर्क करें तथा रिसाव का अवलोकन करें।

मुख्य निरीक्षक : परन्तु समिति दल का एक पूर्व                                  अधिकारी ही नाव पर मोहर लगा चुका है।

एक्सन साहब : हम्म्म्म चीफ साहब प्रतिक्रिया दें।

चीफ साहब : महोदय मेरी प्रतिक्रिया आ चुकी है। अनुभवी                       मुख्य रफुकर के औचक निरीक्षण पर वह आधारित है।

एक्सन साहब : समिति दल को बिना खबर लगे रिसाव                         रोका जाए।

चीफ साहब : महोदय मुख्य रफुकर दल ने नाव को अपने                        क्षेत्र में ले लिया है। रफू कार्य जारी है।

आरोप प्रत्यारोप गोलमेज सम्मेलन पर अल्प विराम!

                                      (2)
मुख्य रफुकर : महोदय लगता है रिसाव के आस पास की                          सारी फट्टीयां उखाड़नी पड़ेंगी। कार्य लंबे समय तक चलेगा, दल को पर्याप्त समय चाहिए नहीं तो ग्राहक सम्बन्धों, पोत की प्रतिष्ठा पर विपरीत असर पड़ेगा।
हम अपने प्रस्तावित लक्ष्यों से पिछड़ सकते हैं। 
समिति दल भी हमें गलत समझ सकता है। हमें पूर्व विभागों पर कड़ाई बरतनी होगी। हमें निरीक्षण दलों के भी कान ऐंठने होंगे। हम किसी भी हाल में इस रिसाव को छोटा नहीं समझना चाहिए। ये आने वाले भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है। हमारा भविष्य वैसे भी खतरे में है। प्रतिस्पर्धियों से हमें खतरा है। वे हमारा काम छीन सकते हैं जिस से पोत का भविष्य खतरे में पड़ सकता है और......

मुख्य अभियंता : बीच मे रोकते हुए बोले पर यह रिसाव पूर्व                        में हुए निरीक्षण के बाद पाया गया है। अतः मुझे लगता है आपके द्वारा लगाए गए अंतिम फट्टे की मरम्मत से काम हो जाएगा।

मुख्य रफुकर : महोदय आप अभी नए हैं। हमारा अनुभव                          जो बोलेगा वो ही सही होगा। आप निश्चिंत रहें बस आप देखते रहिये हम अपने अथक प्रयासों से सब छेद कर देंगे ...... मतलब भर देंगे।

मुख्य अभियंता : ( रफुकर पर निर्भरता से विवशता के भाव                          लिए) ठीक है आप कीजिये।

देखते ही देखते छेद के आस पास के सभी फट्टे निकाल दिए गए और फट्टे निकलने से हुए छेदों को निरीक्षण दल ने भी औचक निरीक्षण किया।

मुख्य रफुकर : उफ्फ्फ मैंने इतना खराब कार्य सपने में भी                         नहीं देखा।

निरीक्षण दल : परंतु ये छेद तो उखाड़ी गयी फट्टे की किलों                        के भी हो सकते हैं।

मुख्य रफुकर : जी हो सकते हैं पर हैं नहीं।

निरीक्षण दल : परन्तु मुख्य छेद की रिपोर्ट .....

मुख्य रफुकर निरीक्षण दल को चुप करवाते हुए : 
 ओह फो! आप चिंता मत कीजिये वो कोई छेद है! छेद तो ये हैं इतने सारे अब हम ये सब ठीक कर देंगे। और चिंता मत कीजिये आप जहाँ कहेंगे आपकी बात भी रख लेंगे।

समय का उचित उपयोग करते हुए, रफुकर दल ने नाव को फिर से तैयार कर दिया है। मुख्य रफुकर ने एक बार फिर सीना ठोका, इधर एक्सन साहब, मुख्य निरीक्षक और चीफ साहब ने अपना माथा ठोका।
समिति दल फीता काटने के लिए हमेशा की तरह मुख्य रफुकर दल की तरह ततपर तथा समर्पित है।
  







 












रविवार, 12 सितंबर 2021

पत्रकार

लबों पे आग,आंखों खून होना चाहिए,
हमे वो दहाड़,अब वो ललकार चाहिए,
अब अंगारो के सेज से भी न डरे जो।
आज इस देश को वो पत्रकार चाहिए।

कलम चले तो,अक्षरों में धार चाहिए,
प्रहार से दोफाड़ हों,वो घाव चाहिए,
इंक़लाबी कलम इतनी धारदार चाहिए,
आज इस देश को वो पत्रकार चाहिए। 
                                                        (नितेश तिवारी)
सियासतों की सियासती से रुकसती,
सियासत का नंगा खेल नहीं चाहिए।
नकेल कसे जो चाल चले सियासती,
आज इस देश को वो पत्रकार चाहिए।
                                                         (नितेश तिवारी)
जन से,जन का,जन को राज चाहिए, 
तपिश,वो तपन,वो आवाज़ चाहिए,
खून में रवानगी,वो रफ्तार चाहिए।
आज इस देश को वो पत्रकार चाहिए।

नितेश तिवारी

बुधवार, 18 अगस्त 2021

जलन

जलन
अगर नहीं किसी को झुका सकते
तो आखिर लोग जलते क्यों हैं?
अगर नहीं किसी को देख सकते,
तो उस को इतना देखते क्यों है?

जब खुजली नहीं जाती है।
फिर भी आंखे मसलते क्यों हैं?
कुढ़न की बदनामी नहीं जाती है।
फिर भी कुढ़ने को बेबस क्यों है।

जलन खा जाती है इंसान को,
निगल जाती है,इंसानियत को,
दोमुंहे बनकर घूमना पड़ता है।
जन्म देती है,हैवानियत को।

ऐसे लोग जीवित नहीं होते।
अंदर से मर चुके होते है।
सीधे कुछ कह नहीं पाते,
ये लोग बहुत दोगले होते हैं।





मंगलवार, 17 अगस्त 2021

मिथ्या से चोरी


भनक तो उसको लगी थी,
पर देखती ही रह गयी थी,
शमा जला कर चला आया हूँ।
गजरे से महक ही चुरा लाया हूँ।

अशर्फियों से आशिक़ी थी उसको,
चाशनी बेस्वाद लगती थी उसको,
ज़िंदगी का जश्न मना के आया हूँ।
उसकी आशिक़ी ही चुरा लाया हूँ।

वो मिथ्या में जी रही थी,
मिथक भंग कर आया हूँ।
मर मर के जी रही थी।
उसकी मिथ्या चुरा लाया हूँ।

झरोखे से बाट जोहती होगी,
भीड़ में मुझे खोजती होगी।
सुखचैन उड़ा कर आया हूँ,
नैनों को ही चुरा लाया हूँ।

शनिवार, 8 मई 2021

Each night I remember

Each Night I remember,
When I was held your hand.
When we were on the beach.
we used to walk on the sand.

Each night I remember,
When I made mistake intentionally,
Then Your high level of temper.
Then I smile,used to get forgiveness instantly.

Each night I remember,
When you screamed on your pimple.
I convinced you in simple manner,
Leave it baby,See your dimple.

Each Night I remember,
Whatever heppens,Tired or bothered.
For give pleasure to each other.
We used to fall in love togethered.