शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

#बेटियाँ

ओस की बूंद सी होती है बेटियाँ,
स्पर्श खुरदरा हो,तो रो देती बेटियां।
रौशन करेगा बेटा एक कुल तो,
दो कुलों की लाज होती हैं बेटियाँ।
कोई नहीं होता एक दूसरे से कम,
मोती अगर बेटा, तो हीरा होती बेटियाँ।
काँटों की राह पर खुद चलती रहती,
औरों की राह में फूल बो देती बेटियां।
विधि का विधान है,यही दुनिया की रस्म,
मुठ्ठी में भरे नीर सी होती हैं बेटियां।
संसार ने ये कैसी रीत है बनाई,
अपनी होते भी पराई होती हैं बेटियां।

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