ज्ञान,विज्ञान,वाणिज्य,कला
खेल-कूद या हो कुछ और,
विश्व धरातल पर चर्चित हूँ मैं।
देखो मुझे,युवा भारत हूँ मैं।
विकास,संस्कृति और परंपरा,
लिए हाथो में लक्ष्य,मैं चल पड़ा।
विश्व ह्रदय विजयी हूँ मैं।
ध्यान दो,युवा भारत हूँ मैं।
धर्म,जाति, वर्ग,विषय,
इन सब से ऊपर उठ चुका।
विश्व प्रगति ले,आगे बड्ड चला।
विश्व विकास का वर्चस्व हूँ मैं।
उपेक्षित नहीं,युवा भारत हूँ मैं।
सत्य भी हूँ मैं।
शिव है मुझमें,
सूंदर भी हूँ मैं।
सत्यम शिवम सुंदरम शास्वत हूँ मैं।
विशालकाय हूँ,ये आडम्बर नहीं,
हे विश्व देखो मुझे युवा भारत हूँ मैं।।
खेल-कूद या हो कुछ और,
विश्व धरातल पर चर्चित हूँ मैं।
देखो मुझे,युवा भारत हूँ मैं।
विकास,संस्कृति और परंपरा,
लिए हाथो में लक्ष्य,मैं चल पड़ा।
विश्व ह्रदय विजयी हूँ मैं।
ध्यान दो,युवा भारत हूँ मैं।
धर्म,जाति, वर्ग,विषय,
इन सब से ऊपर उठ चुका।
विश्व प्रगति ले,आगे बड्ड चला।
विश्व विकास का वर्चस्व हूँ मैं।
उपेक्षित नहीं,युवा भारत हूँ मैं।
सत्य भी हूँ मैं।
शिव है मुझमें,
सूंदर भी हूँ मैं।
सत्यम शिवम सुंदरम शास्वत हूँ मैं।
विशालकाय हूँ,ये आडम्बर नहीं,
हे विश्व देखो मुझे युवा भारत हूँ मैं।।
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