अब उठो वसुधा के रक्षक,
अकृन्दन व् चीत्कार सुनो,
मत बनो वसुधा के भक्षक,
धरती माँ की भी पुकार सुनो।
कर लिया हमने बहुत अपना,
अब धरती माँ का भी उद्धार करो।
बिलखती नदियां कह रही,
अब तो कुछ उपकार करो।
कहाँ कहाँ से रोकोगे मुझको,
केदारनाथ,चेन्नई,केरल पर विचार करो।
त्रासदियों को गीदड़ भभकी समझने वालों,
कंक्रीट के जंगल का बंद ये निर्माण करो।
बंद करो विनाशलीला रूपी विकासलीला,
हरे आभूषण अलंकृत धरा का निर्माण करो।
हे प्रदूषकों,इस विदूषक पर भी ध्यान धरो,
धरती की करुण वंदन पुकार सुनो।
अकृन्दन व् चीत्कार सुनो,
मत बनो वसुधा के भक्षक,
धरती माँ की भी पुकार सुनो।
कर लिया हमने बहुत अपना,
अब धरती माँ का भी उद्धार करो।
बिलखती नदियां कह रही,
अब तो कुछ उपकार करो।
कहाँ कहाँ से रोकोगे मुझको,
केदारनाथ,चेन्नई,केरल पर विचार करो।
त्रासदियों को गीदड़ भभकी समझने वालों,
कंक्रीट के जंगल का बंद ये निर्माण करो।
बंद करो विनाशलीला रूपी विकासलीला,
हरे आभूषण अलंकृत धरा का निर्माण करो।
हे प्रदूषकों,इस विदूषक पर भी ध्यान धरो,
धरती की करुण वंदन पुकार सुनो।
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