गुरुवार, 19 सितंबर 2019

जहाज़ी

मेरी रगों में तैरना,
और नसीब में बहना,
लिखा है,
लहरों से ऊँचा जज़्बा है मेरा,
मेहनत की दवात से,
नसीब मैंने अपना लिखा है।
हूँ बहुत बड़ा जहाजी मैं,
कूंच करता हूँ जहां,
साहिल को मेरा जहाज,
मंजिल को मेरा मस्तूल दिखता है।

नितेश तिवारी 

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