दुनिया बहुत बुरी है,
मैं कुछ कर नहीं सकता।
खफा तुझसे नहीं ऐ दुनिया,
खफा खुद से हूँ कि तुझे बदल नहीं सकता।
जिंदगी बिता दी इतनी यूँ ही मैंने,
सब पा कर भी,गवां कर बैठा हूँ,
न जाने क्या खोजने निकला था,
आज खुद को ही भुला कर बैठा हूँ।
अब और क्या कहूँ खुद के बारे में,
न गिला किसी से,न शिकवा किसी से,
न मोहब्बत किसी से,न वफ़ा किसी से।
जो होना होगा,वो देखा जायेगा,
मुख़्तार बनने का सिला देती है ये दुनिया,
मैं अपना मुकद्दर ही भुला कर बैठा हूँ।
मैं कुछ कर नहीं सकता।
खफा तुझसे नहीं ऐ दुनिया,
खफा खुद से हूँ कि तुझे बदल नहीं सकता।
जिंदगी बिता दी इतनी यूँ ही मैंने,
सब पा कर भी,गवां कर बैठा हूँ,
न जाने क्या खोजने निकला था,
आज खुद को ही भुला कर बैठा हूँ।
अब और क्या कहूँ खुद के बारे में,
न गिला किसी से,न शिकवा किसी से,
न मोहब्बत किसी से,न वफ़ा किसी से।
जो होना होगा,वो देखा जायेगा,
मुख़्तार बनने का सिला देती है ये दुनिया,
मैं अपना मुकद्दर ही भुला कर बैठा हूँ।
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