गुरुवार, 19 सितंबर 2019

उठो पार्थ


करो स्मरण माँ कुंती के वनवास को
करो स्मरण द्रौपदी की चीत्कार को,
कुरु वंश का रणभूमि में न उपहास हो,
कि भावी पीढ़ी को तुम पर धित्कार हो।

तोड़ डालो,दुर्योंधन के अहंकार को,
निष्फल कर दो,दुष्टों के हर प्रहार को,
समाप्त करो,बढ़ते दुष्टों के भार को,
सुनो तुम माँ वसुधा की पुकार को।

मंद पड़ जायें,पोडरिक,हिरण्यगर्भ और विदारक,
कुछ ऐसी देवदत की आज ललकार हो,
कर दो शत्रु के रक्त से कुरुक्षेत्र को रक्तरंजित,
आज उद्धार करने वाली धरती का भी उद्धार हो।

पार्थ,संघार करो तुम शत्रु का,
चढ़ाओ प्रत्यंचा अपने गांडीव पर,
हृदय दहल जाये शत्रु का,
मात्र प्रत्यंचा की हर टंकार पर।

विषय विकार से ऊपर उठ जाओ,
कर्तव्य परायणता का व्यवहार करो।
भावी पीढ़ी का आदर्श बन जाओ,
धर्मयुद्ध की विजय पताका फहराओ।

(पौराणिक काल में,सभी योद्धाओं के युद्ध उद्घोषणा के लिए शंख होते थे।पौडरिक पितामह भीष्म का,हिरण्यगर्भ कर्ण का और विदारक दुर्योधन का शंख था।)


नितेश तिवारी 'गौमेध'
दूरभाष-9999329945





































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