मेरी जवानी
मैं बेख़ौफ़ उड़ा करता था,मौजों के ऊपर
जब अंदर का नौजवाँ उमड़ता था।
जंग मैंने जीती थी कई,
मेरा कारवाँ जहाँ से भी गुजरता था।
पग पग चलते पहर का पता न चलता था,
वक़्त मेरे और मैं वक़्त के साथ चलता था।
आंधियो से बनती नही थी मेरी,
तेज हवाओं से मैं लड़ता था।
पर मेरी बेपरवाही ने शहादत दे दी नौजवानी को,
जब वक़्त साथ न देता तो मैं वक़्त से अकड़ता था।
जवानी के जोश का सिरमौर न था मेरा,
बड़ी मर्दानगी से वक़्त से झगड़ता था।
अब वो हवाएं उडती नही,आंधिया संद है
शोर तो बहुत है,बस मेरी ही आवाज़ मंद है।
अटखेलियां,शैतानियां,मेरी हाज़िरजवाबी,
उमर्दराजी की बैरकों घुट चुकी है मेरी जवानी।
मैं बेख़ौफ़ उड़ा करता था,मौजों के ऊपर
जब अंदर का नौजवाँ उमड़ता था।
जंग मैंने जीती थी कई,
मेरा कारवाँ जहाँ से भी गुजरता था।
पग पग चलते पहर का पता न चलता था,
वक़्त मेरे और मैं वक़्त के साथ चलता था।
आंधियो से बनती नही थी मेरी,
तेज हवाओं से मैं लड़ता था।
पर मेरी बेपरवाही ने शहादत दे दी नौजवानी को,
जब वक़्त साथ न देता तो मैं वक़्त से अकड़ता था।
जवानी के जोश का सिरमौर न था मेरा,
बड़ी मर्दानगी से वक़्त से झगड़ता था।
अब वो हवाएं उडती नही,आंधिया संद है
शोर तो बहुत है,बस मेरी ही आवाज़ मंद है।
अटखेलियां,शैतानियां,मेरी हाज़िरजवाबी,
उमर्दराजी की बैरकों घुट चुकी है मेरी जवानी।
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